
Rajesh Exports SEBI Fraud: ₹15 लाख करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश — Rajesh Mehta पर 3 साल का बैन
भारतीय पूंजी बाजार नियामक SEBI ने 3 जून 2026 को बेंगलुरु स्थित सोना कंपनी Rajesh Exports Limited और उसके प्रमोटर-चेयरमैन Rajesh Mehta के खिलाफ एक 109 पेज का अंतरिम आदेश जारी किया है। SEBI ने कंपनी पर FY2021 से FY2025 के बीच ₹15.15 लाख करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है — यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी कथित अकाउंटिंग धोखाधड़ी में से एक है।
Rajesh Exports क्या है? — कंपनी का इतिहास
Rajesh Exports Limited की स्थापना 1989 में बेंगलुरु में हुई थी। कंपनी के संस्थापक Rajesh Mehta ने 1980 के दशक में मात्र ₹1,200 की पूंजी और चांदी के कारोबार से इस साम्राज्य की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे यह कंपनी सोने की रिफाइनिंग, निर्माण और निर्यात में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन गई।
2015 में Rajesh Exports ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया और $400 मिलियन नकद में स्विट्जरलैंड की Valcambi SA को खरीदा — जो दुनिया की सबसे बड़ी सोना रिफाइनरी है। इस अधिग्रहण के बाद कंपनी का दावा था कि वह दुनिया के 35% सोने की प्रोसेसिंग करती है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कंपनी का नाम | Rajesh Exports Limited (NSE: RAJESHEXPO | BSE: 531500) |
| स्थापना | 1989, बेंगलुरु, कर्नाटक |
| प्रमोटर-चेयरमैन | Rajesh Mehta |
| मुख्य व्यवसाय | सोना रिफाइनिंग, गहना निर्माण व निर्यात, SHUBH Jewellers रिटेल |
| प्रमुख सहायक कंपनी | Valcambi SA, स्विट्जरलैंड |
| शेयर मूल्य (4 जून 2026) | ₹103.92 (5% गिरावट) |
SEBI का आदेश — क्या है पूरा मामला?
SEBI के Whole Time Member Kamlesh Chandra Varshney ने 3 जून 2026 को यह आदेश जारी किया। SEBI के अनुसार कंपनी ने FY2021 से FY2025 के बीच अपने वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया।
मुख्य आरोप क्या हैं?
- 🔴 राजस्व फुलाना: कंपनी के 97–99% consolidated revenue विदेशी सहायक कंपनियों, खासकर Valcambi SA, से दिखाए गए। SEBI का कहना है कि Valcambi के अपने standalone वित्तीय विवरण बहुत कम राजस्व दिखाते हैं।
- 🔴 डेरिवेटिव लेनदेन की गड़बड़ी: Rajesh Mehta के निजी सोना डेरिवेटिव ट्रेड — जिनकी बिक्री ₹11,487 करोड़ और खरीद ₹11,488 करोड़ थी — को गलत तरीके से कंपनी के खाते में दर्ज किया गया।
- 🔴 फंड डायवर्जन: कंपनी के ₹338.90 करोड़ Rajesh Mehta और Siddharth Mehta के निजी खातों में भेजे गए, बिना बोर्ड या ऑडिट कमेटी की मंजूरी के।
- 🔴 Exchange Fluctuation गड़बड़ी: ₹867 करोड़ के विनिमय उतार-चढ़ाव को revenue में और ₹716 करोड़ को purchases में दिखाया गया।
- 🔴 ऑडिटर की भूमिका: दो ऑडिटर्स PV Ramana Reddy और PL Venkatadri पर भी आरोप है कि उन्होंने कंपनी के 64 standalone revenue विवरणों को गलत तरीके से पास किया और invoices जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं मांगे।
Valcambi कनेक्शन — असली राज
SEBI की जांच का केंद्र Rajesh Exports की स्विस सहायक कंपनी Valcambi SA है। Valcambi दुनिया की सबसे बड़ी सोना रिफाइनरी मानी जाती है और इसे Rajesh Exports ने 2015 में $400 मिलियन में खरीदा था।
SEBI के अनुसार, Rajesh Exports ने Valcambi के माध्यम से gross gold transaction values को बिना पर्याप्त दस्तावेज, customer records या संबंधित ledger entries के राजस्व के रूप में दिखाया। साथ ही, Valcambi के अपने audited financials में जो राजस्व दिखाया गया, वह group statements में दिखाए गए से बहुत कम था — यह विसंगति ही इस पूरे मामले की जड़ है।
घटनाक्रम — Timeline
- मार्च 2024 एक शेयरधारक की शिकायत के आधार पर SEBI ने जांच शुरू की, जिसमें दो साल से अधिक समय से बड़ी व्यापार प्राप्तियां बकाया होने का आरोप था।
- FY2020–FY2024 Forensic जांच का दायरा — इन 5 वर्षों के वित्तीय विवरणों की गहन जांच की जा रही है।
- 3 जून 2026 SEBI ने 109 पेज का ex-parte अंतरिम आदेश जारी किया। Rajesh Mehta और कंपनी दोनों को सिक्योरिटीज मार्केट से बैन किया।
- 4 जून 2026 कंपनी के शेयर 4.99% गिरकर ₹103.92 पर आए। Rajesh Mehta ने Moneycontrol से कहा, “यह एक अंतरिम आदेश है और इसमें कुछ भी सत्य नहीं है।”
- 5 जून 2026 BSE ने CNBCTV18 में छपी खबरों के संदर्भ में कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा। Canara Bank ने ₹509.37 करोड़ के NPA लोन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की।
Canara Bank का संकट — ₹509 करोड़ का NPA
Rajesh Exports की मुसीबतें केवल SEBI तक सीमित नहीं हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक Canara Bank ने कंपनी को दिए गए ₹509.37 करोड़ के ऋण को गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) घोषित कर दिया है। बैंक ने इस distressed debt को बेचने के लिए बोली लगाने वालों को आमंत्रित किया है और साथ ही कंपनी के खिलाफ दिवालिया (insolvency) याचिका भी दाखिल की है।
इसके अलावा, LIC का Rajesh Exports में निवेश भी चर्चा में है। LIC की हिस्सेदारी का मूल्य 2026 की शुरुआत में ₹637 करोड़ से घटकर अब लगभग ₹347 करोड़ रह गया है।
शेयरहोल्डर्स पर असर
SEBI के अनुमान के अनुसार, इस पूरे मामले से शेयरहोल्डर्स की संपत्ति में लगभग ₹12,725.53 करोड़ की क्षति हुई है, जिसमें खुदरा निवेशक (retail investors) भी शामिल हैं।
शेयर प्रदर्शन की बात करें तो पिछले 6 महीनों में शेयर करीब 45% और पिछले 5 वर्षों में लगभग 80% गिर चुका है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी मार्च 2023 के 17.6% से घटकर मार्च 2026 में 14.3% रह गई है।
कंपनी का पक्ष
Rajesh Exports ने SEBI के सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा, “कंपनी को भरोसा है कि SEBI अपनी समझ से इस स्थिति को स्पष्ट करेगा और प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर सही निष्कर्ष पर पहुंचेगा।”
Rajesh Mehta ने व्यक्तिगत रूप से 4 जून को कहा: “यह एक अंतरिम आदेश है और इसमें कुछ भी सत्य नहीं है। हम इसका अध्ययन कर रहे हैं और जवाब तैयार करेंगे।”
आगे क्या होगा?
SEBI ने इस मामले को NFRA (National Financial Reporting Authority) को भी भेजा है, ताकि ऑडिटर्स की जवाबदेही तय की जा सके। Forensic जांच जारी है। कंपनी और Rajesh Mehta दोनों को SEBI के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में corporate governance और consolidated financial reporting के नियमों पर एक महत्वपूर्ण बहस खड़ी करेगा।



